
काँच के किनारों पर दरारें आने से कैसे बचें (आईआर तकनीक)
काँच के साथ काम करना बहुत मुश्किल है, क्योंकि यह बहुत ही कमजोर सामग्री है। यदि आप इसे कमरे के तापमान पर काटने की कोशिश करें, तो आंतरिक तनाव के कारण काँच में दरारें आ जाती हैं। ऐसी स्थिति में काँच का उपयोग असंभव हो जाता है।
इस समस्या का समाधान इन्फ्रारेड (IR) ऊष्मा का उपयोग है। दरअसल, हम काँच को उस समय ही गर्म कर देते हैं, जब ब्लेड या लेजर उसके निकट आता है।
यह तकनीक क्यों कारगर है?
जब काँच को गर्म किया जाता है, तो उसकी सामग्री थोड़ी अधिक लचीली हो जाती है। ऐसे में काँच पर दबाव एक ही बिंदु पर नहीं, बल्कि पूरी सतह पर वितरित होता है। इससे काँच पर दरारें नहीं आतीं।
ऊष्मा की बर्बादी न करें
यदि आप केवल आईआर लैंप का ही उपयोग करें, तो यह ऊर्जा की बर्बादी होगी। ऊष्मा 360 डिग्री में फैल जाती है, जिससे काँच के बजाय मशीन ही गर्म हो जाती है।
इसलिए हम सोने या एल्यूमीनियम के रिफ्लेक्टरों का उपयोग करते हैं। ये रिफ्लेक्टर ऊष्मा को सीधे काँच पर ही भेजते हैं। इससे काँच जल्दी ही वांछित तापमान तक पहुँच जाता है। इससे कार्य करने में लगने वाला समय कम हो जाता है, एवं बिजली की भी बचत होती है।
ध्यान रखने योग्य बातें
आप ऊर्जा को अधिकतम स्तर पर नहीं रख सकते। यदि काँच को अत्यधिक गर्म किया जाए, तो नई समस्याएँ पैदा हो जाती हैं। इसलिए लैंप की शक्ति एवं कंवेयर की गति के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।
कुछ उपयोगी सुझाव:
– सटीक PID कंट्रोलरों का उपयोग करें।
– अपने कूलिंग फैनों की जाँच करें; यदि वे पर्याप्त न हों, तो सेंसर नष्ट हो जाएंगे।
– रिफ्लेक्टरों को हमेशा साफ रखें। थोड़ी धूल भी कार्यक्षमता को कम कर सकती है।